Thursday, 6 May 2021

इश्क़ मै जली हो क्या

महकती हो ऐसे अरे यार कली हो क्या
बेफ़ज़ूल मुस्कुरा रही इश्क़ मै जली हो क्या

 

~ शोभित राजपूत

 

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Wednesday, 5 May 2021

Mohabbat aur Gurur

हे मोहब्बत तुझे किस बात पे गुरुर है,
तेरा साथ जो ना मिले तो तू किसे मंजूर है,
लोग तुझे बदनाम करते है,
और तू सोचती है की, ये मेरा कसूर है !!

 

~ राहुल मेहता

 

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Tuesday, 4 May 2021

मुसीबत के इस दौर में

मुसीबत के इस दौर में, कुछ कर सको तो करो।
बहुतों को नहीं मिल रहा है, अपनों का साथ।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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Monday, 3 May 2021

कैद है मेरा प्यार इन दीवारो के पीछे

पहले इश्क़ करने को जमाना चाहिये था,
तुम मिली तो सब पुराना चाहिये था।
कैद है मेरा प्यार इन दीवारो के पीछे,
रिहा करने को दोस्तना चाहिये था।
मिल्कियत बनायी है मेहनत से मैने,
एक घर खड़ा करने को तुम्हे ज़माना चाहिये था।
सुना है काफी दिन से चुप हूँ मै,
मुहँ खुल्वाने को तुम्हे हँसाना चाहिये था।
लफ्ज़ कम नही होती इश्क़ मे कभी भी,
तुम्हे बस एक बार बताना चाहिये था।
महफ़ूज रहा हर आँसु पलको पर,
अब रोने को बस एक अफसाना चाहिये था।

 

– प्रखर तिवारी

 

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मनुष्य की लगन में रुकावट

LACK IN DILIGENCE…Could damage the men’s…FLOW OF RESISTANCE

 

 

MEANING in Hindi –

 

मनुष्य की लगन में रुकावट आना,
यही कारण मनुष्य की बाधा बन जाती है,
उसके शरीर में बाधा घातक विघुत धारा बनके तैरती है||

 

~ Ramdhun Singh

 

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Sunday, 2 May 2021

आखरी खत शायरी

इश्क़ लफ़्ज़ों से आंखो में उतर आया है
जब हमें उसका आखरी खत आया है
खत में आंसू के निशान थे जहां-जहां
वहां-वहां शब्द-ए-वफा आया है
ये हाल है अब तो कि दस्तक
कोई भी दरवाज़े पे दे तो लगता है तु आया है

 

~ unknown

 

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Saturday, 1 May 2021

ज़िक्र कुछ यार का किया जाये | Gazal

ग़ज़ल 1

ज़िक्र कुछ यार का किया जाये
ज़िन्दगी आ ज़रा जिया जाये हो
चुकी हो अगर सज़ा पूरी
दर्दे -दिल को रिहा किया जाये
चाँद छूने के ही बराबर है
मखमली हाथ छू लिया जाये
दर्द-ओ-ग़म की बहुत ज़रूरत है
चल कहीं दिल लगा लिया जाये
हसरतें ईद की अधूरी हैं
ख़ामुशी से जता दिया जाये

 


 

ग़ज़ल 2

 

इन्तिज़ार इन्तिज़ार है तो है एतिबार एतिबार है
तो है छोड़ कर मुझको सिर्फ़ इक वो चाँद हिज़्र का राज़दार है
तो है बावला दिल मेरी तो सुनता नहीं आपका इख़्तियार है
तो है मैं हूँ नादाँ अगर तो हूँ तो हूँ वो अगर होशियार है तो है
दीद का लुत्फ़ हो गया हासिल अब नज़र कर्ज़दार है तो है

 


 

ग़ज़ल 3

दर्द जब दिल का दुबाला हो गया
चेह्रा चेह्रा इक रिसाला हो गया
रात भर पढ़ते रहे हम चाँद को
आसमाँ इक पाठशाला हो गया
लोरियाँ माँ ने सुनाई और फिर
मेरे सपनों में उजाला हो गया
जब अना कुचली गई तो ये हुआ
आँख रोई दिल में छाला हो गया है
मुहब्बत आबे-ज़मज़म की तरह
पी लिया जिसने वो आला हो गया

 

– सारथी बैद्यनाथ

 

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