Saturday, 21 November 2020

ज़िंदगी का सार हो तुम मां

गुलाब की तरह हो तुम मां! मेरे मन मंदिर में महकती हो।
ज़िंदगी का सार हो तुम मां! तुम्हीं दिल से मुझे समझती हो।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘बरसाने’

 

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