Tuesday, 20 October 2020

मां के बिना कैसी जीवन की डगर

मां तो ममता का घर होती है।
पास हो तो कहां ये खबर होती है।।
दूर होते हैं तब ये एहसास होता है।
कि मां के बिना कैसी जीवन की डगर होती है।।

 

~ Rb Verman Pratapgarhi

 

The post मां के बिना कैसी जीवन की डगर appeared first on Shayari.

Friday, 16 October 2020

अपनों ने ही किया क़त्ल मेरी इच्छाओं का

बहुत दिन हो गए देखते देखते
अब मैं भी कुछ कहना चाहता हूँ,

नादान था मैं….

नहीं था अंदाज़ा ज़माने के रीति रिवाज़ो का
वक़्त ने संघर्ष से सिखाया रुख परखना हवाओं का

फर्क नहीं पड़ा मुझपे दूसरों की बद्दुआओं का
अपनों ने ही किया क़त्ल मेरी इच्छाओं का

 

~ अतुल शर्मा

 


 

Bahut din ho gaye, dekhte dekhte,
Ab Main bhi kuch kahna chahta hu,
Naadan tha main…

Nahi tha andaja jamane ke reeti rivazo kaa…
Waqt ne struggle se sikhaya rukh parakhna hawao ka..

Fark ni pda mujhpe doosron ki badduao ka,
Apno ne hi kiya qatl meri icchao ka….

 

~ Atul Sharma

 

The post अपनों ने ही किया क़त्ल मेरी इच्छाओं का appeared first on Shayari.

Tuesday, 6 October 2020

पापा मैं आप से कुछ कहना चाहती हूँ

Emotional Poem Papa ke liye From beti

 

पापा मैं आपसे कुछ कहना चाहती हूँ।
पापा मैं आपके साथ बैठना चाहती हूँ.

आपसे बहुत कुछ कहना चाहती हूँ..
अपने दर्द बयाँ कर रोना चाहती हूँ।

पापा मैं आपसे सब सीखना चाहती हूँ
जब भी दिल घबराता है..
आप को ही याद करती हूँ..

‘BE STRONG ‘पापा है ना
ये ख्याल आते ही शांत हो जाती हूँ।

न आप की बात बुरी लगती है
न मैं आपसे लड़ना चाहती हूँ।

पापा मैं आप से एक बात कहना चाहती हूँ।
मैं कई बार अकेली सी पड़ जाती हूँ..

मैं आप को आवाज़ लगाना चाहती हूँ।
पापा मैं आप को बहुत चाहती हूँ

हाँ, मैं कभी नही बताती..
मगर मैं आप के जैसा बनना चाहती हूँ।

पापा मैं आप से कुछ कहना चाहती हूँ….!

 

~ Anushthi Singh

 

The post पापा मैं आप से कुछ कहना चाहती हूँ appeared first on Shayari.

गर्दिश में सितारे

हवाओं के इशारे होते हैं,
नदियों के भी किनारे होते हैं।
सिर्फ अहसास करने की बात है,
कभी कभी गर्दिश में सितारे ह़ोते हैं।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

The post गर्दिश में सितारे appeared first on Shayari.

Saturday, 3 October 2020

देश की बेटी हूँ, मुझे अब बस न्याय चाहिए

जैसा की हम सभी को पता हैं, हाथरस वाले केस में जो भी हुआ वो मानवता की, इंसानियत की हत्या है| इस देश में एक बेटी, एक औरत के लिए रहना कितना मुश्किल होने लगा है| अगर हम आज भी आवाज़ नहीं उठा पाएंगे या अपने आप के अंदर बसे हैवान को नहीं मार पाएंगे तो कल को ये हादसा किसी अपने के साथ भी हो सकता है, इसलिए हम सभी को इसके खिलाफ आवाज़ उठानी चाहिए, और इस तरह हो रहे अंन्याय पर न्याय की मांग करनी होगी |
हाथरस वाली बेटी, या देश में जितने भी ये घिनोने काम हुए है और हो रहे है, उन सभी बेटी की आत्मा, उनका मन, उनकी रूह सिर्फ और सिर्फ यही कह रहा होगा जो हम इस कविता में प्रस्तुत कर रहे है, इसे जरूर पड़े और लोगो से जरूर शेयर करे ताकि हम इस कविता के द्वारा ज्यादा से ज्यादा लोगो को समझा पाए की एक औरत की राह कितनी मुश्किल है, जहाँ एक तरह बेटियों को बेटो की बराबर जगह देने की बात होती हैं और दूसरी और ये दरिंदगी |

 

न्याय की मांग में एक बेटी पर कविता

Justice for Manisha Desh ki Beti Kavita

 

बचपन से ही लोगो ने समझाया …
पापा की इज्जत हूं,
बचा के रखना हर किसी ने बतलाया ,
हर शौक को खत्म कर मैंने,
सूट और 2 मीटर का दुप्पटे को अपनाया ,
बचपन से ही लोगो ने समझाया….

मां ने बोला दुपट्टा फैला के रखना ,
लड़के कुछ भी बोले,
लेकिन तुम कभी कुछ ना कहना ,
क्योंकि तुम बेटी हो,
तुम्हे तो ज़िन्दगी भर है सहना ,

बचपन से ही हर किसी का था यही कहना,,
बेटी हो बच के रहना ।
मैंने मां की बातो को ज़िन्दगी में उतार लिया ,
बड़ी सी कमीज़,
और तन को ढकने का पायजामा सिला लिया ,
देर रात तक बाहर ना रहना,
पापा की इज्जत हो ,
इन सब बातो को,
हर किसी ने मेरे सुबह का नाश्ता बना दिया ,
चाय में शक्कर के साथ इन बातो को भी मिला दिया ।।

एक दिन बाहर गई ….
फैलाकर दुपट्टा, बालों की सीधी चोटी,
क्योंकि मा ने बोला था
jeans, top, hairstyles ऐसी लडकिया safe नहीं होती ,
आगे बढी तो एहसास हुआ …
कोई मेरे पीछे हैं, मन घबराया, दिल जोर से चिल्लाया ,
लेकिन माँ की बाते याद आ गयी ,,,,
सूट, सलवार, सीधी चोटी,..और मैं लड़की ……
मुझे चिल्लाने का तो हक ही नहीं था ,
मेरे कदम रुक से गए थे..
मेरी साँस थम् सी गई थी,

बस उस वक्त पापा की इज्जत सामने आ खड़ी थी।।
ना रात थी , ना jeans था ….
यूँ दबोच मुझें नीचे गिराया , चिल्लाती भी तो कैसे??
माँ ने कभी चिल्लाना नहीं सिखाया ,
रुयी चिल्लायी कोई सुनने वाला नहीं था ,
मेरे जिस्म की नुमाईश, कोई ढकने वाला नहीं था ।।

लड़ी उस दम तक, जब तक पापा की इज्जत बचा सकती थी,
रोई गिड़गिड़ायी जब जब माँ की बाते याद आती थी,
हैवानियत जब हद से पार हो गई,
उस वक़्त मैं खुद से भी हार गई।।
जीना चाहती थी, बोलना चाहती थी,
अपने माँ के अंगना फिर से खेलना चाहती थी।।
बोलूँ भी तो किससे?? कौन मेरी बाते सुनेगा?
जीभ कटी मेरी, कौन मेरी आवाज़ बनेगा????

हड्डी तोड़े, पैर तोड़े इस दरिन्दगी को दुनिया से कौन कहेगा??
मेरे चरित्र पर अब उठे सवालो पर, अब कौन लड़ेगा??
फ़िर भी मैं लड़ना चाहती थी, इन दरिंदो से।।
लेकिन अब मैं अकेली हो गई थी आखे बंद कर,
न्याय की उम्मीद लिये मैं हमेशा के लिए सो गई थी।।।
लेकिन माँ से बहोत सारे सवाल अधूरे रह गए,
Jeans, top, सूट सलवार, रात दिन ??
माँ इनमे से अब क्या चुने ????

ना मुझे Candle March चाहिए,
ना ही Poster March चाहिए।।।
मैं भी इस देश की बेटी हु,
मुझे अब बस न्याय चाहिए …….

 

~ Shikha upadhyay

 

The post देश की बेटी हूँ, मुझे अब बस न्याय चाहिए appeared first on Shayari.

तुम मेरी सरगम बनो और मैं संगीत

तुम मेरी लय बनो और मैं तेरा गीत बनूं ,
तुम मेरी प्रीत बनो और मैं तेरा मीत बनूं ।
दुख की बरसात हो या खुशियों की बेला,
तुम मेरी सरगम बनो और मैं संगीत बनूं।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

The post तुम मेरी सरगम बनो और मैं संगीत appeared first on Shayari.

Friday, 2 October 2020

Pyar Ke Effects Shayari

जब रंग मोहब्बत का चढ़ता है,
तो ख्वाहिशे शौकीन हो जाती है।
वादियां हँसीन और फिज़ाये संगीन हो जाती है,
दिल में चेहरा सिर्फ दिलबर का होता है ,
और सारी दुनिया रंगीन हो जाती है।
इश्क़ में मेहबूबा के दीवाने इस कदर मगरूर हो जाते है,
दुनिया के लिए अज़िब और आशिकी में अज़िज़ बनकर,
सारी दुनिया में मशहूर हो जाते है।

 

-आयुष्मान पांडेय

 

The post Pyar Ke Effects Shayari appeared first on Shayari.