Monday, 8 February 2021

तुम जहां जाओ महफ़िलें लूट ल़ो

गुलाब की तरह ख़ुशमिज़ाज रहो।
चमकते-दमकते आफ़ताब रहो।
तुम जहां जाओ महफ़िलें लूट ल़ो।
सभी के ज़िगर में सरताज़ रहो।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

 

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Sunday, 7 February 2021

करीब होकर भी दूर

अगर वो कहता है तुम्हें बदलने को,
तो वो तुम्हें नहीं तुम्हारे बदले रूप को चाहता है,
होकर भी करीब तुम्हारे, वो तुम्हें अधूरा ही जान पाता है

 

~ Meri Pehchan

 

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उम्मीद पे गुज़ारी एक शाम

आज इस उम्मीद पे गुज़ारी है मैंने एक शाम,
की फिर कोई शाम सिर्फ उम्मीद पे ना गुजरे ।

 

~ NK

 

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कुछ बचा नहीं अब खोने को

कुछ बचा ही नहीं अब खोने को,
अश्क भी निकलते नहीं अब रोने को ।

 

~ NK

 

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नफरत हो या इश्क, करना आना चाहिए

दरिया आग का हो या पानी का, तैरना आना चाहिए ।
नफरत हो या इश्क, करना आना चाहिए ।

 

~ NK

 

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तेरा इंतजार हर पल

मेरी दुआओं में शामिल तेरा ज़िक्र हर बार रहेगा,
तुझे हो ना हो, मुझे तेरा इंतजार हर पल रहेगा ।

 

~ NK

 

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चंचल मन मेरा

मन के अंदर झांक रहा है मन मेरा।
मन की भाषा बोल रहा है मन मेरा।
मन भावों का एक समुंदर होता है।
मन चंचल है घूम रहा है मन मेरा..।

 

~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’

 

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